TDS / TCS क्या है | What is TDS/TCS |

 

TDS / TCS क्या है | What is  TDS/TCS |
TDS / TCS क्या है | What is  TDS/TCS |
 

Introduction

Hello दोस्तों यहाँ पर आज हम सीखेंगे TDS / TCS क्या होता है। यह एक तरह का Government द्वारा लगाया गया Tax है जो Income tax के अंतर्गत आता है। आगे बढ़ने से पहले आपको यह दोनों का Full Form जाना ज़रूरी है। इसी से ही आपको पता लगेगा कि कौनसा Deduction करना है। और कौनसा Collection करना है।

  • TDS का Full Form TAX DEDUCTED AT SOURCE होता है।
  • TCS का Full Form TAX COLLECTED AT SOURCE होता है।

आप यह सोचते होंगे कि इसमें फरक क्या है एक में DEDUCTED है। एक में COLLECTED है। दोस्तों यह दोनों एक दूसरे से बहुत ही अलग है। बल्कि कहे तो विरोधाभासी है। अगर आप दोनों को एक ही समझेंगे तो आपसे गलती हो जाएगी। इसके लिए सबसे पहले आपको Deduction और Collection के बारे में समझना होगा। इसके बारे में आप आगे समझेंगे।

Deduction क्या होता है ?

जैसे कि आप नाम से समझ सकते हो की Deduction मतलब काटना होता है।

Collection क्या होता है ?

जैसे कि आप नाम से समझ गए होंगे की Collection का मतलब वसूल करना होता है।

 

अभी भी आपको हो सकता है समझ में नहीं आया हो। लेकिन जब यह दोनों का पूरा विश्लेषण दूंगा उदाहरण के साथ तो आपको पूरी तरह समझ में आ जाएगा। सिर्फ़ आपको DEDUCTED और COLLECTED याद रखना है।

 

TDS क्या होता है और कैसे काम करता है?

यह एक Government की तरफ़ से लगाया गया Tax है जो आगे जाकर Income tax बन जाता है। अगर आप कोई Partnership Firm या PVT LTD और LTD Company चलाते हो तो आपको शुरुआत से ही TDS applicable हो जाता है। और अगर आप Proprietor company चलाते हो तो आपका turnover Tax Audit मैं जाता है तो दूसरे साल से आपको TDS applicable हो जाता है।

 

ज्यादातर मामलों में आपको खर्चों के ऊपर TDS काटना होता है। TDS का अलग-अलग Percentage होता है जो Government मैं पहले से ही निर्धारित किया है। Company मैं होने वाले सभी खर्चो के ऊपर TDS नहीं Deduct होता Government मैं पहले से ही कुछ खर्चों को निर्धारित किए हैं। उसके ऊपर ही Deduction होता है। जो खर्चों में TDS Deduction होता है उसे Government ने अलग-अलग section और Percentage के हिसाब से निर्धारित किया है। अगर आपके खर्चे एक Person या Company के साथ अगर-अगर कुछ Amount से ज़्यादा होता है तो ही TDS काटना होता है। इसकी जानकारी पहले से ही Government ने दे दी है। यहाँ पर ज्यादातर Services दे रहे लोगों का TDS काटा जाता है।

 

TCS क्या होता है ?

यह एक Government की तरफ़ से लगाया गया Tax है जो आगे जाकर Income tax बन जाता है। Government ने कुछ Goods items ऊपर अंकुश लगाने के लिए TCS नाम का Tax लाया है।

 

Government ने पहले ही कुछ Goods items निर्धारित कर रखा है। जिसको आप अगर Sale करेंगे तो आपको सामने वाली पार्टी से TCS COLLECT करना अनिवार्य होगा। अगर आप चाहो तो उसे Sale bill के अंदर भी लगा सकते हो। Government ने पहले से ही अलग-अलग Section के ऊपर अलग-अलग Percentage के हिसाब से निर्धारित किए हैं। इसकी जानकारी Government ने पहले से ही दे रखी है। ज्यादातर Government Restricted Goods परी लगाया जाता है।

 

क्या TDS/TCS हमारा फायदा होता है ?

यहाँ पर आप यह सोचते होंगे कि यह जो TDS / TCS हमने Deduction और Collection किया है। वह तो हमारा फायदा हो गया। जबकि ऐसा नहीं है। इसको आपको जो भी महीने में कांटा या में वसूल किया है उसको अगले महीने की 7 तारीख से पहले Government मैं Deposit कर देना है। और उसका लेखा-जोखा Quarterly Return Filed करके Government को दे देना है। Quarterly का मतलब June, September, December, March महीन के बाद में TDS 30 तारीख के अंदर और TCS 15 तारीख के अंदर Filed कर देना है। अगर आप नहीं करते हो तो आपको भारी Penalty देनी पड़ सकती है। जो दिन के 200 / -रुपए के हिसाब से लगती है। TDS / TCS भरने के लिए आपको TAN Number की आवश्यकता होती है।

 

TAN Number क्या होता है ?

TAN Number का Full Form Tax Deduction Account Number होता है। जिसको Government Issue करती है। जैसे आप PAN Number का Application करते हो ऐसे ही आपको TAN Number का Application करना होता है। जिसके अंदर पहले 3 District के Alphabet को दिखाता है। 4 नाम का पहला Alphabet को दिखाता है। इसके बाद 5 अंक होते हैं जो Government अपने हिसाब से लेती है। और अंत में एक Alphabet होता है जो Government अपने हिसाब से लेती है।

 
MUM – Mumbai
 
S – Suresh
 
12345 – Random Number By Government
 
A – Random Alphabet By Government 
 
जिसको मिलाकर TAN Number MUMS12345A बनता है।

TDS/TCS मैं कौन सा लेखा-जोखा देना होता है ?

TDS/TCS Return Filed करते वक्त आपको 3 Part मैं Details देनी होती है।
  • TDS /TCS Party Detail
 
  • TDS/TCS Deduction/Collection Detail
 
  • TDS/TCS Challan Detail
 

1) TDS/TCS Party Detail

यहाँ पर आपको जो भी Party का TDS / TCS, Deduction / Collection करना होता है उसकी जानकारी 2 Part मैं देनी होती है।
  • Name of Party – यहाँ पर आपको Party का नाम देना होता है।
 
  • PAN Number of Party – यहाँ पर आपको Party का PAN Number देना होता है।
 
वैसे तो आप PAN Number से Party कौन-सी Category मैं आती है। वह आपको मैंने Type of Pan Number ने बताया है।
 

2) TDS/TCS, Deduction/Collection Detail

यहाँ पर आपको TDS / TCS, Deduction / Collection की जानकारी देनी होगी उसकी जानकारी 5 Part मैं देनी होती है।
  • Date of Deduction / Collection – आपने जिस दिन यह Tax Deduct और Collect किया है वह Date लिखेंगे।
 
  • Amount – आपने जिस Amount पर यह Tax Deduct और Collect किया है वह Amount लिखेंगे।
 
  • Section – आपने जिस Section के अंदर यह Tax Deduct और Collect किया है वह Section लिखेंगे।
 
  • Percentage – आपने जो Percentage मैं यह Tax Deduct और Collect किया है वह Percentage लिखेंगे।
 
  • TDS/TCS Amount  – आपने जो TDS / TCS Amount का यह Tax Deduct और Collect किया है वह Amount लिखेंगे।
 

3) TDS / TCS Challan Detail

यहाँ पर आपको TDS / TCS Challan Detail की जानकारी देनी होगी उसकी जानकारी 4 Part मैं देनी होती है।
 
  • BSR Code Number – आपने जो TDS / TCS Bank में भरा है। उस Bank और Branch का एक BSR Code Number होता है। जो Challan के ऊपर लिखा हुआ होगा वह आपको देना है।
 
  • Challan Number – आपने जो TDS / TCS Bank मैं भरा है। उस Challan का एक Challan Number होता है वह आपको देना है।
 
  • Date of Challan – आपने जो TDS / TCS Bank मैं भरा है उस Challan पर Date होता है वह आपको देना है।
 
  • Amount of Challan – आपने जो TDS / TCS Bank मैं भरा है उस Challan का Amount होता है वह आपको देना है।
Tip – TDS / TCS Section wise महीने के अंत में कितना भी Amount होता है। वह एक ही Challan मैं भरा जाएगा। पर यदि आप TDS / TCS का Return भरोगे जो आपको अलग-अलग Entry के सामने Challan एडजस्ट करना होगा।
 

Government ने TDS का Rule क्यों लाया ?

यहाँ पर सोचने वाली बात यह है कि अगर TDS एक तरह का Income Tax हे तो Government को TDS लाने की ज़रूरत क्यों पड़ी। दोस्तों इसके पीछे दो कारण है।

 

पहला कारण यह है कि पहले लोग Profit को छुपाने के लिए खर्चे डालने होते थे। जो खर्चे Cash मैं होते थे वह तो पहले से ही डालें गए होते थे। पर जब भी Cash In Hand ख़त्म हो जाती थी तब वह लोग Commission, Labour, Interest, जैसे खर्चे को डालकर Profit कम कर देते थे। क्योंकि इस तरह के खर्चो को वह लोग बाद में भी Payment कर सकते थे। इस बात की जानकारी Government को लग चुकी थी। इसलिए उन्होंने यह Rule निकाला ताकि Profit छुपाने के सारे रास्ते बंद हो जाए।

 

दूसरा कारण यह है कि पहले लोग Profit को छुपाने के लिए खर्चे डालते थे पर उसके सामने Income कोई नहीं दिखाता था। अगर किसी ने Expenses दिखाया है। तो Income भी तो दिखानी चाहिए। इस बात की जानकारी Government को लग चुकी थी।  इसलिए उन्होंने TDS का Rule लेकर आए। इसमें आपको सामने वाले का PAN NUMBER लिखना है जिस से Government को पता चले यह किसकी Income है।

Government ने TCS का Rule क्यों लाया ?

यहाँ पर सोचने वाली बात यह है कि अगर TCS एक तरह का Income Tax हे तो Government को TCS लाने की ज़रूरत क्यों पड़ी दोस्तों इसके पीछे दो कारण है।

 

पहला कारण यह है कि पहले कुछ Commodity मैं Black Marketing होती थी जैसे कि Gold। Government को पता ही नहीं चलता था कि कितना Gold किसके पास है। इसलिए Government अंकुश लगाने के लिए TCS नाम का Tax लाया है।

 

दूसरा कारण यह है कि पहले old Commodity को New Manufactured करने के लिए कौन-कौन से manufacturers है। और manufacturing करने के बाद कितना Value Addition होता है। और उसकी सही Value से माल बिक रहा है कि नहीं। जैसे कि Gold ornaments इस पर अंकुश लगाने के लिए TCS नाम का Tax लाया है।

 

Conclusion

आपको मैंने यहाँ पर TDS / TCS से जुड़ी हुई सभी जानकारी देने का प्रयास किया है। जिसके अंदर TDS / TCS सभी जानकारी आसान भाषा में समझाया है। मैं मानता हूँ कि आपको यह समझ में आया होगा। अगर कुछ चीजें समझ में नहीं आई हो, या फिर और भी पूछना हो तो आप नीचे Comment Box मैं पूछ सकते हैं। इसके अलावा अगर आपको Mutual Fund, Account, Tally, Tax और Investment के बारे में कुछ भी जानकारी चाहिए तो, आप Comment Box मैं पूछ ले हो सके उतनी जल्दी जवाब देने का प्रयास करूंगा।

 
 

Leave a Comment